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हावड़ा ब्रिज के बारे में तथ्य – Fact about Howrah Bridge

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facts about Howrah Bridge
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1. हावड़ा ब्रिज हुगली नदी पर बना एक बहुत ही मशहूर पुल है जो पश्चिम बंगाल के दो बड़े शहरों हावड़ा और कोलकाता को जोड़ता है। यह कोलकाता की संस्कृति का प्रतीक बन चुका है।

2. यह दुनिया का सबसे व्यस्त (Busiest) पुल है।

3. यह पुल/सेतु 2,313 फ़ीट लम्बा और 269 फ़ीट ऊँचा है। इसकी चौड़ाई 71 फ़ीट है, जिसमें दोनों तरफ 15-15 फ़ीट चौड़े दो फूटपाथ भी हैं।

4. यह पुल 73 साल पुराना है। इसे बनने में लगभग 6 साल लगे। 3 फ़रवरी, 1943 में इसका इस्तेमाल शुरू हुआ, जो आज तक जारी है।

5. हावड़ा ब्रिज पर हर रोज 1 लाख से भी ज्यादा गाड़ियाँ गुजरती हैं और 1.5 लाख पैदलयात्री (वर्तमान में इससे भी ज्यादा) इस पर चलते हैं।

6. इसकी क्षमता 60,000 टन वजन सहने की है। लेकिन बढ़ती जनसंख्या ने ट्रैफिक को इतना बढ़ा दिया कि आज हावड़ा ब्रिज पर हर समय 90,000 टन का वजन रहता है। इसीलिए कई ट्रामों और ज्यादा वजनी ट्रकों को दूसरे रास्तों या पुलों पर स्थानांतरित किया जा रहा है।

7. यह पूरा पुल उच्च-तन्य मिश्रधातु (High-tensile alloy) स्टील का बना हुआ है, जिसे Tiscrom कहा जाता है।

8. इसे बनाने में 26,500 टन स्टील खपत हुई थी, जिसमें से 87% स्टील ‘टाटा स्टील कम्पनी’ द्वारा ख़रीदा गया था।

9. इस परियोजना (Project) के लिए सारी स्टील इंग्लैंड से लायी जा रही थी। लेकिन जापान के धमकी की वजह से सिर्फ 3000 टन स्टील ही लाया जा सका। बाकि स्टील की खरीद ‘टाटा स्टील’ से की गयी।

10. आज जहाँ हावड़ा ब्रिज है दरअसल वहाँ कभी पोंटून (Pontoon) सेतु था, जिसे विकसित करके हावड़ा ब्रिज बनाया गया।

11. शुरुआत में इसका नाम ‘न्यू हावड़ा ब्रिज’ था। 14 जून, 1965 में बंगला साहित्य के महान कवि; प्रथम एशियाई और प्रथम भारतीय नोबेल पुरष्कार विजेता ‘रवींद्रनाथ टैगोर’ के सम्मान में इसका नाम बदलकर ‘रवीन्द्र सेतु’ कर दिया गया। लेकिन यह आज भी हावड़ा ब्रिज के नाम से ही जाना जाता है।

12. हुगली नदी पर हावड़ा ब्रिज के अलावा 5 और सेतु हैं:

  • विद्यासागर सेतु (दूसरी हुगली ब्रिज)
  • विवेकानन्द सेतु
  • निवेदिता सेतु
  • ईश्वर गुप्ता सेतु
  • नसीरपुर रेल ब्रिज (निर्माणाधीन)

13. 2000 फ़ीट से भी अधिक लम्बे इस पुल में सिर्फ 2  ही स्तंभ (Support) हैं, जिनकेबीच की लम्बाई 1500 फ़ीट है।

14. अपने निर्माण के समय यह पूरे विश्व में तीसरा (3rd) सबसे लम्बा पुल था। आज यह अपनी तरह का विश्व का छठा (6th) सबसे लम्बा पुल है।

15. हावड़ा ब्रिज के देखभाल की जिम्मेदारी ‘कोलकाता पोर्ट ट्रस्ट (KoPT)’ की है। इस ट्रस्ट की स्थापना हावड़ा ब्रिज के स्थापना से भी 73 साल पहले सन् 1870 मेंहुई थी।

16. इसे बनाने के इकरार (Contract) केलिए 20 से भी ज्यादा कम्पनियों को चुना गया था, जिसमें जर्मनी की एक कम्पनी ने सबसे कम की बोली लगाई। लेकिन विश्व युद्ध और राजनैतिक कारणों से इस कम्पनी को कॉन्ट्रैक्ट नहीं दिया जा सका।

17. आखिर में 1935 मेंइसका कॉन्ट्रैक्ट एक ब्रिटिश कम्पनी Cleveland Bridge & Engineering Co. Ltd. को दिया गया था। लेकिन इसकी संरचना Braithwaite Burn and Jessop Construction Co. Ltd. नामक कम्पनी द्वारा किया गया।

18. इस पूरे ब्रिज का प्रारूप (डिज़ाइन) Rendel, Palmer और Tritton के द्वारा किया गया था।

19. इस पूरे पुल को बनाने में; उस जमाने में 2 करोड़ 50 लाख की लागत आयी थी।

20. भारत में यह अपनी तरह का एकमात्र बाहुधरण (Cantilever) ब्रिज है।

21. गर्मियों के दिनों में इसकी लम्बाई करीब 3 फ़ीट तक बढ़ जाती है, क्योंकि अधिक तापमान में धातु (स्टील) पिघलती औरफैलती है।

22. पक्षियों द्वाराहावड़ा ब्रिज पर की जाने वाली गन्दगी से कोलकाता पोर्ट ट्रस्ट काफी परेशान है क्योंकि इससे ब्रिज की रासायनिक क्षति हो रही है। इसलिए ट्रस्ट हर साल ब्रिज से पक्षियों की गन्दगी हटाने के लिए 5 लाख का कॉन्ट्रैक्ट देता है।

23. लोगों के पान के थूक की वजह से भी ब्रिज की क्षति हो रही है। इसी वजह सेहावड़ा ब्रिज की स्टील पर जंग (Corrosion) लग रहा है।

24. इस पूरेब्रिज को Paint करने के लिए 26,500 लीटर Paint की खपत होती है, जिसमें लगभग 65 लाख रूपये खर्च होते हैं।

25. 2006 के शुरुआत में इसकी मरम्मत करवाई गयी थी, जिसमें 8 टन स्टील की खपत हुई थी। इस पूरे प्रक्रिया में 50 लाख रूपये खर्च हुए थे।

26. यह उम्दा अभियांत्रिकी (इंजीनियरिंग) की बेहतरीन मिसाल है क्योंकिइतने बड़े इस ब्रिज में एक भी नट-बोल्ट (Nut-Bolt) नहीं है। इसमें धातुओं को झलाई (Riveting/Welding) प्रक्रिया द्वारा जोड़ा गया है।

27. यह ब्रिज 60,000 वाहनों की क्षमता रखता है। लेकिन एक रिपोर्ट के मुताबिक 2007 में इस पर 90,000 गाड़ियाँ चल रही थी।

28. माना जाता है कि हावड़ा ब्रिज की कोई चाभी थी जिसे ब्रिटिश कम्पनी ने भारत को नहीं दिया। पुराने ज़माने में इस चाभी से ब्रिज को बड़े समुद्री जहाजों के लिए दो भागों में खोला जाता था। लेकिन इन बातों का कोई प्रमाण नहीं है।

29. एक और मान्यता के अनुसारहावड़ा ब्रिज के इंजीनियर ने कहा था कि यह पुल 12 बजे नष्ट होगा। हालांकि उन्होनें तारीख या am-pm नहीं बताया था। इसलिए हर दिन दोपहर के 12 बजे और रात के 12 बजे इस पुल को बंद कर दिया जाता है। यह बात भी गलत है।

30. 1953 से लेकर आज तक 30 से ज्यादा भारतीय फिल्मों मेंहावड़ा ब्रिज के दृश्य को दिखाया जा चुका है। इनमें विद्या बालन की ‘कहानी’, रणबीर सिंह और अर्जुन कपूर की ‘गुंडे’ और रणबीर कपूर की ‘बर्फी’ भी शामिल है।

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