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550 साल से ‘ध्यान-मग्न’ है यह संत; गांव वाले करते हैं बारी-बारी से देखभाल

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आज हम आपको ऐसी बातें बताने जा रहे है जिसे पढ़ के आप निश्चित ही सोचने पर मजबूर होजओगे . तिब्बत से करीब 2 किलोमीटर दूरी पर हिमाचल प्रदेश है . वहां हिमाचल के अन्दर लाहुल स्पिती के गीयू गांव (Geu village) में एक ध्यान-मग्न संत की हाल ही में एक ममी मिली है। ध्यान देने वाली जो बात है वो ये है की अब तक जितनी भी मम्मी मिली है वो सब लेटी हुई है पर ये ध्यान मगन अवस्था में बैठी हुई है

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1. गांव वालों का ये कहना है की ये ममी पहले गांव में ही रखी हुई थी और एक स्तूप में ये उस गाव में स्थापित थी। परन्तु लोगों का मानना है की तिब्बत के नजदीक होने के कारण यह बौद्ध भिक्षु की ममी लगती है।

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2. वर्ष 1995 में ITBP के जवानों जब सड़क बना रहे थे उसके दौरान ये ममी उन्हें वहां मिली। वहां के रहने वाले लोगों के मुताबिक़, उस समय इस ममी के सिर पर कुदाल लग गया था जिसके वजह से खून भी निकला, जिसके निशान आज भी उस ममी के ऊपर साफ देखे जा सकते हैं।

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3. वर्ष 2009 तक ये ममी ITBP के कैम्पस में सलामत ही रखी रही। बाद में ग्रामीणों ने इसे ये कह के अपने गाव ले गए की ये उनकी अमानत है वहां रख लिए और आज भी उस गावं के सभी परिवार बारी बारी उसकी देखभाल करता है .

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4. जब इस ममी की तो बात ही अलग है यह ममी करीब 545 वर्ष पुरानी है। लेकिन जो हैरान करने वाली बात है वो ये है की इतने साल तक ये ममी बिना किसी लेप के सहारे जमीन में दबी रहने के बावजूद ये अभी भी इसी अवस्था में है

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5. गीयू गांव में बहूत ज्यादा बिच्छु का प्रकोप हो गया था . इस प्रकोप से छुटकारा पाने के लिए और गांव को बचाने के लिए इस संत ने ध्यान लगाने की सलाह दी।

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6. और आप विश्वास नहीं करेंगे जैसे ही संत ने समाधि लगायी वैसे ही गांव में बिना बारिश के इंद्रधनुष निकला और गांव बिछुओं के प्रकोपसे मुक्त हो गया।

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7.एक अन्य मान्यता के हिसाब से ये जीवित ममी बौद्ध भिक्षु सांगला तेनजिंग में स्थित है , जो तिब्बत से भारत आए और फिर वापस न जाकर यहीं इसी गांव में आकर ध्यान में बैठ गए और फिर कंभी उठे ही नहीं।

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ऐसा सब पढने के बाद पता लगता है की हाँ सच में ममी नाम की चीज अभी भी दुनिया में मोजूद है . उसे नकारना मुश्किल है ममी को जितना लोग मानते है उतना ही लोग उसकी देखभाल करने में कोई कमी भी नहीं रखते .

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